ऋग्वेद (मंडल 1)
याभि॑र्म॒हाम॑तिथि॒ग्वं क॑शो॒जुवं॒ दिवो॑दासं शम्बर॒हत्य॒ आव॑तम् । याभिः॑ पू॒र्भिद्ये॑ त्र॒सद॑स्यु॒माव॑तं॒ ताभि॑रू॒ षु ऊ॒तिभि॑रश्वि॒ना ग॑तम् ॥ (१४)
हे अश्चिनीकुमारो! तुमने जिन उपायों द्वारा महान् अतिथि सत्कार करने वाले एवं राक्षसों के भय से जल में घुसने को प्रस्तुत दिवोदास को शंबर असुर द्वारा मारे जाते समय बचाया था तथा संग्राम में त्रिसदस्यु ऋषि की रक्षा की, उन्हीं उपायों को लेकर आओ. (१४)
O aschinikumaro! Bring the measures by which you saved Divodas, who had given the great hospitality and the fear of demons, to enter the water, when he was killed by the Shambar Asura, and protected the sage Trisadsyu in the struggle. (14)