ऋग्वेद (मंडल 1)
याभि॑र्नरा श॒यवे॒ याभि॒रत्र॑ये॒ याभिः॑ पु॒रा मन॑वे गा॒तुमी॒षथुः॑ । याभिः॒ शारी॒राज॑तं॒ स्यूम॑रश्मये॒ ताभि॑रू॒ षु ऊ॒तिभि॑रश्वि॒ना ग॑तम् ॥ (१६)
हे नेता रूप अश्विनीकुमारो! तुमने जिन उपायों द्वारा शंयु, अत्रि एवं प्रथम मनु को दुःख से निकलने का मार्ग बताया था एवं स्यूमरशिमि की रक्षा के उद्देश्य से उनके शत्रुओं पर बाण चलाया था, उन्हीं उपायों के साथ यहां आओ. (१६)
O leader Ashvinikumaro! Come here with the same measures by which you told Shanyu, Atri and the first Manu the way out of misery and fired an arrow at their enemies with the aim of protecting Syumarshimi. (16)