ऋग्वेद (मंडल 1)
याभिः॑ कृ॒शानु॒मस॑ने दुव॒स्यथो॑ ज॒वे याभि॒र्यूनो॒ अर्व॑न्त॒माव॑तम् । मधु॑ प्रि॒यं भ॑रथो॒ यत्स॒रड्भ्य॒स्ताभि॑रू॒ षु ऊ॒तिभि॑रश्वि॒ना ग॑तम् ॥ (२१)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम दोनों ने जिन उपायों से युद्ध में कृशानु की रक्षा की, युवा पुरुकुत्स के दौड़ते हुए घोड़े को बचाया तथा मधुमक्खियों को सर्वप्रिय मधु प्रदान किया, उन्हीं उपायों के साथ आओ. (२१)
O aschinikumaro! Come up with the measures by which you both protected Krishnanu in battle, saved the running horse of the young purukuts, and provided the bees with the best-loved honey. (21)