हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.116.15

मंडल 1 → सूक्त 116 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 116
च॒रित्रं॒ हि वेरि॒वाच्छे॑दि प॒र्णमा॒जा खे॒लस्य॒ परि॑तक्म्यायाम् । स॒द्यो जङ्घा॒माय॑सीं वि॒श्पला॑यै॒ धने॑ हि॒ते सर्त॑वे॒ प्रत्य॑धत्तम् ॥ (१५)
हे अश्चिनीकुमारो! जिस प्रकार पक्षी का पंख अलग हो जाता है, उसी प्रकार खेल राजा की पत्नी विश्पला का पैर युद्ध में कट गया था. तुमने शत्रुओं द्वारा छिपाया हुआ धन प्राप्त करने के निमित्त चलने के लिए विश्पला के लिए रात भर में लोहे का पैर बनाकर दिया था. (१५)
Oh Ashwini kumars! Just as a bird's wing gets separated, the wife of the Khel king, Vishpala's leg was cut off in the war. You had made an iron leg overnight for Vishpala to walk in order to get the wealth hidden by the enemies. (15)