ऋग्वेद (मंडल 1)
पु॒रू वर्पां॑स्यश्विना॒ दधा॑ना॒ नि पे॒दव॑ ऊहथुरा॒शुमश्व॑म् । स॒ह॒स्र॒सां वा॒जिन॒मप्र॑तीतमहि॒हनं॑ श्रव॒स्यं१॒॑ तरु॑त्रम् ॥ (९)
हे बहुरूपधारी अश्चिनीकुमारो! तुमने पेदु ऋषि को शीघ्रगामी सहस्र संख्या वाले धन का दाता, बलवान्, शत्रुओं द्वारा जीतने में अशक्य, शन्रुहंता, स्तुतिपात्र एवं रक्षक अश्व दिया था. (९)
O polymorphic aschinikumaro! You gave the sage Pedu the giver of wealth, the giver of the fast-moving millennium, the power, the ashkya, the devil, the protector, and the protector of the enemies. (9)