ऋग्वेद (मंडल 1)
स्तम्भी॑द्ध॒ द्यां स ध॒रुणं॑ प्रुषायदृ॒भुर्वाजा॑य॒ द्रवि॑णं॒ नरो॒ गोः । अनु॑ स्व॒जां म॑हि॒षश्च॑क्षत॒ व्रां मेना॒मश्व॑स्य॒ परि॑ मा॒तरं॒ गोः ॥ (२)
उसने आकाश को धारण किया, असुरों द्वारा चुराई गई गायों को निकाला एवं परम भासमान होकर प्राणियों द्वारा सेवित एवं अन्न का कारण वर्षाजल बिखेरा. वह महान् अपनी पुत्री उषा के पश्चात् उदय होता है. उसने घोड़ी को गाय की माता बनाया. (२)
He held the sky, took out the cows stolen by the asuras, and, being the supreme devotee, served by the animals and scattered the rainwater due to the food. He rises after his daughter Usha. He made the horse the mother of the cow. (2)