हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.13.4

मंडल 1 → सूक्त 13 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 13
अग्ने॑ सु॒खत॑मे॒ रथे॑ दे॒वाँ ई॑ळि॒त आ व॑ह । असि॒ होता॒ मनु॑र्हितः ॥ (४)
हे मानवों द्वारा प्रशंसित अग्नि! अपने परम सुखद रथ पर देवों को यहां ले आओ. तुम मानव हितकारी एवं देवों को बुलाने वाले हो. (४)
O fire admired by humans! Bring the gods here on your most pleasant chariot. You are the man-benefactor and the one who calls the gods. (4)