हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.137.2

मंडल 1 → सूक्त 137 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 137
इ॒म आ या॑त॒मिन्द॑वः॒ सोमा॑सो॒ दध्या॑शिरः सु॒तासो॒ दध्या॑शिरः । उ॒त वा॑मु॒षसो॑ बु॒धि सा॒कं सूर्य॑स्य र॒श्मिभिः॑ । सु॒तो मि॒त्राय॒ वरु॑णाय पी॒तये॒ चारु॑रृ॒ताय॑ पी॒तये॑ ॥ (२)
हे मित्र एवं वरुण! हमारे यज्ञ में आओ, क्योंकि यह निचोड़ा हुआ पतला सोमरस दही के साथ मिला दिया गया है. चाहे उषाकाल हो, चाहे सूर्य की किरणें चमकने लगी हों, यह निचोड़ा हुआ सोम वरुण एवं मित्र के पीने हेतु यज्ञभूमि में प्रस्तुत है. (२)
Oh my friend and Varun! Come to our yajna, because it has been mixed with squeezed thin somras curd. Whether it is ushakaal, whether the sun's rays have started shining, this squeezed mon is presented in the yagnabhoomi for Varuna and a friend to drink. (2)