हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.142.3

मंडल 1 → सूक्त 142 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 142
शुचिः॑ पाव॒को अद्भु॑तो॒ मध्वा॑ य॒ज्ञं मि॑मिक्षति । नरा॒शंस॒स्त्रिरा दि॒वो दे॒वो दे॒वेषु॑ य॒ज्ञियः॑ ॥ (३)
देवों के मध्य शुद्ध, पवित्रकर्ता, आश्चर्यजनक, तेजस्वी एवं यज्ञसंपादक नराशंस अग्नि स्वर्गलोग से आकर हमारे यज्ञ को तीन बार मधु से सींचते है. (३)
Among the gods, the pure, the holy, the astonishing, the stunning and the sacrificial narasans comes from the fire heavens and irrigates our yajna with honey three times. (3)