हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.16.5

मंडल 1 → सूक्त 16 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
सेमं नः॒ स्तोम॒मा ग॒ह्युपे॒दं सव॑नं सु॒तम् । गौ॒रो न तृ॑षि॒तः पि॑ब ॥ (५)
हे इंद्र! हमारे उस स्तोत्र को सुनकर यज्ञ के समीप आओ. सोमरस तैयार है. उसे ऐसे पिओ, जैसे प्यासा हिरण पानी पीता है. (५)
O Indra! Listen to that hymn of ours and come close to the yajna. Somras is ready. Drink it like a thirsty deer drinks water. (5)