ऋग्वेद (मंडल 1)
सु॒षु॒प्वांस॑ ऋभव॒स्तद॑पृच्छ॒तागो॑ह्य॒ क इ॒दं नो॑ अबूबुधत् । श्वानं॑ ब॒स्तो बो॑धयि॒तार॑मब्रवीत्संवत्स॒र इ॒दम॒द्या व्य॑ख्यत ॥ (१३)
हे ऋभुओ! तुम सूर्यमंडल में सोकर सूर्य से पूछते हो-“हे आदित्य! हमारे कर्म की प्रेरणा कीन देता है?” सूर्य इसका उत्तर देते है-“तुम्हें जगाने वाला वायु है. वर्ष व्यतीत होने पर तुम संसार में प्रकाश फैलाओ.” (१३)
Hey, Lord! You sleep in the solar system and ask the sun, "O Aditya! What inspires our karma?" The sun replies, "There is an air that awakens you. When the year passes, spread the light in the world." (13)