हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.161.4

मंडल 1 → सूक्त 161 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 161
च॒कृ॒वांस॑ ऋभव॒स्तद॑पृच्छत॒ क्वेद॑भू॒द्यः स्य दू॒तो न॒ आज॑गन् । य॒दावाख्य॑च्चम॒साञ्च॒तुरः॑ कृ॒तानादित्त्वष्टा॒ ग्नास्व॒न्तर्न्या॑नजे ॥ (४)
हे ऋभुओ! यह कार्य करने के पश्चात्‌ तुमने प्रश्न किया कि जो अग्नि देवों का दूत बनकर हमारे समीप आया था, वह कहां चला गया? जिस समय त्वष्टा ने चमस को चार टुकड़ों में विभक्त देखा तो स्वयं को स्त्री मानने लगा. (४)
Hey, Lord! After you have done this work, you asked, "Where has he gone, who came to us as the messenger of the fire gods?" At the time when Tvastha saw the spoon divided into four pieces, she considered herself a woman. (4)