हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.161.7

मंडल 1 → सूक्त 161 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 161
निश्चर्म॑णो॒ गाम॑रिणीत धी॒तिभि॒र्या जर॑न्ता युव॒शा ताकृ॑णोतन । सौध॑न्वना॒ अश्वा॒दश्व॑मतक्षत यु॒क्त्वा रथ॒मुप॑ दे॒वाँ अ॑यातन ॥ (७)
हे सुधन्वा के पुत्रो! तुमने चर्मरहित मरी हुई गाय को अपनी बुद्धि से नया बनाया है, बूढ़े माता-पिता को युवा किया है एवं एक घोड़े से दूसरा उत्पन्न किया है, इसलिए तुम तैयारी करके इंद्रादि देवों के सामने आओ. (७)
O sons of Sudhanva! You have made the dead cow without skin with your wisdom a new one, made the old parents young and produced from one horse to another, so prepare and come before the Indradi Devas. (7)