हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.162.19

मंडल 1 → सूक्त 162 → श्लोक 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 162
एक॒स्त्वष्टु॒रश्व॑स्या विश॒स्ता द्वा य॒न्तारा॑ भवत॒स्तथ॑ ऋ॒तुः । या ते॒ गात्रा॑णामृतु॒था कृ॒णोमि॒ ताता॒ पिण्डा॑नां॒ प्र जु॑होम्य॒ग्नौ ॥ (१९)
इस दीप्त अश्व का प्रकाशकर्ता एकमात्र ऋतु ही है. रात एवं दिन उस ऋतु का नियंत्रण करने वाले हैं. हे अश्व! तुम्हारे जिन अंगों को मैं अनुकूल समय पर काटता हूं, उन्हें पिंड बनाकर मैं अग्नि में हवन करूंगा. (१९)
The lighter of this radiant horse is the only season. Night and day are going to control that season. Oh, horse! By making your limbs which I cut at a favorable time, I will make them a pinna in the fire. (19)