ऋग्वेद (मंडल 1)
यू॒प॒व्र॒स्का उ॒त ये यू॑पवा॒हाश्च॒षालं॒ ये अ॑श्वयू॒पाय॒ तक्ष॑ति । ये चार्व॑ते॒ पच॑नं स॒म्भर॑न्त्यु॒तो तेषा॑म॒भिगू॑र्तिर्न इन्वतु ॥ (६)
जो लोग यूप के लिए उपयोगी पेड़ काटने वाले हैं, जो यूप के निमित्त कटे हुए पेड़ को ढोने वाले हैं, जो अश्व बांधने वाले यूप में चषाल अर्थात् बांधने योग्य सिरा बनाते हैं अथवा जो घोड़े का मांस पकाने के लिए लकड़ी के बरतन तैयार करते हैं, इन सबमें मेरा संकल्प समा जाए. (६)
Those who are the ones who cut down trees useful for the yupe, who carry the cut tree for the sake of the yupe, who make the chashle in the horse-tying yup, or who prepare wooden utensils to cook horse meat, let my resolve be included in them all. (6)