ऋग्वेद (मंडल 1)
च॒त्वारि॒ वाक्परि॑मिता प॒दानि॒ तानि॑ विदुर्ब्राह्म॒णा ये म॑नी॒षिणः॑ । गुहा॒ त्रीणि॒ निहि॑ता॒ नेङ्ग॑यन्ति तु॒रीयं॑ वा॒चो म॑नु॒ष्या॑ वदन्ति ॥ (४५)
वाणी के चार निश्चित पद होते हैं. क्रांतदर्शी ब्राह्मण उन्हें जानते हैं. उन में से तीन गुहा में छिपे होने से दृष्टिगोचर नहीं होते, चौथे पद वाली वाणी को मनुष्य बोलते हैं. (४५)
There are four fixed terms of speech. The revolutionary Brahmins know them. Three of them are not visible by being hidden in the cavity, the voice of the fourth verse is spoken by man. (45)