हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.166.15

मंडल 1 → सूक्त 166 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 166
ए॒ष वः॒ स्तोमो॑ मरुत इ॒यं गीर्मा॑न्दा॒र्यस्य॑ मा॒न्यस्य॑ का॒रोः । एषा या॑सीष्ट त॒न्वे॑ व॒यां वि॒द्यामे॒षं वृ॒जनं॑ जी॒रदा॑नुम् ॥ (१५)
हे मरुतो! आहार के योग्य मांदार्य कवि का यह स्तुतिसमूह तुम्हारे लिए है. यह स्तुति स्तुतिकर्तता की शरीर पुष्टि की कामना से तुम्हें प्राप्त होती है. हम भी इसके द्वारा अन्न, बल एवं दीर्घ आयु प्राप्त करें. (१५)
O Maruto! This group of hymns of the diet-worthy Mandarya poet is for you. This praise is received by you by wishing to affirm the body of eulogy. Let us also get food, strength and long life through it. (15)