हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.167.7

मंडल 1 → सूक्त 167 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 167
प्र तं वि॑वक्मि॒ वक्म्यो॒ य ए॑षां म॒रुतां॑ महि॒मा स॒त्यो अस्ति॑ । सचा॒ यदीं॒ वृष॑मणा अहं॒युः स्थि॒रा चि॒ज्जनी॒र्वह॑ते सुभा॒गाः ॥ (७)
मैं मरुतों की प्रशंसनीय एवं सरलता से समझ में न आने वाली महिमा का वर्णन करता हूं. मरुतों से संबंधित बिजली बरसने की इच्छा वाली, अहंकार युक्त स्थिर सौभाग्यशालिनी एवं जननसमर्थ प्रजाओं को धारण करने वाली है. (७)
I describe the admirable and simply unintelligible glory of the Maruts. The electricity related to the maruts is going to hold the people with the desire to rain, the ego-possessed stable good fortune and the support of the people. (7)