हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.173.5

मंडल 1 → सूक्त 173 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 173
तमु॑ ष्टु॒हीन्द्रं॒ यो ह॒ सत्वा॒ यः शूरो॑ म॒घवा॒ यो र॑थे॒ष्ठाः । प्र॒ती॒चश्चि॒द्योधी॑या॒न्वृष॑ण्वान्वव॒व्रुष॑श्चि॒त्तम॑सो विह॒न्ता ॥ (५)
हे होता! इंद्र की स्तुति करो. वे अनंत शक्ति वाले, शूर, धनवान्‌, रथ पर स्थिर, सामने लड़ने वाले योद्धाओं में उत्तम, वञ्रधारणकर्ता एवं मेघ के विनाशक हैं. (५)
O Hota! Praise Indra. He is the best of the warriors who fight in front, with infinite power, the brave, rich, steady on a chariot, the bearer of the thunderbolt and the destroyers of the clouds. (5)