ऋग्वेद (मंडल 1)
मु॒षा॒य सूर्यं॑ कवे च॒क्रमीशा॑न॒ ओज॑सा । वह॒ शुष्णा॑य व॒धं कुत्सं॒ वात॒स्याश्वैः॑ ॥ (४)
हे मेधावी एवं समर्थ इंद्र! तुमने अपनी शक्ति से सूर्य के एक पहिए को चुरा लिया था. तुम शुष्ण नामक असुर का वध करने के लिए वायु के समान तेज चलने वाले घोड़ों की सहायता से वज्र लेकर आओ. (४)
O bright and able Indra! You stole a wheel of the sun with your power. You bring a thunderbolt with the help of fast-moving horses like the wind to kill the asura named Shushna. (4)