हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.18.4

मंडल 1 → सूक्त 18 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 18
स घा॑ वी॒रो न रि॑ष्यति॒ यमिन्द्रो॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑ । सोमो॑ हि॒नोति॒ मर्त्य॑म् ॥ (४)
इंद्र, वरुण और सोम जिस यजमान की उन्नति करते हैं, उस वीर पुरुष का विनाश नहीं होता. (४)
The host that Indra, Varuna and Som progress to, that heroic man is not destroyed. (4)