हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.181.5

मंडल 1 → सूक्त 181 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 181
प्र वां॑ निचे॒रुः क॑कु॒हो वशा॒ँ अनु॑ पि॒शङ्ग॑रूपः॒ सद॑नानि गम्याः । हरी॑ अ॒न्यस्य॑ पी॒पय॑न्त॒ वाजै॑र्म॒थ्रा रजां॑स्यश्विना॒ वि घोषैः॑ ॥ (५)
हे अश्विनीकुमारो! तुम में से एक का पीले रंग का श्रेष्ठ रथ हमारी इच्छा के अनुसार यज्ञभूमि में आ जाए एवं दूसरे को मनुष्य स्तुतियां तथा उसके घोड़ों को मथा हुआ खाद्य देकर प्रसन्न करे. (५)
O Ashwinikumaro! Let the best chariot of one of you in yellow come to the land of the yagna according to our will and please the other by giving praises to man and his horses with churned food. (5)