हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.182.5

मंडल 1 → सूक्त 182 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 182
यु॒वमे॒तं च॑क्रथुः॒ सिन्धु॑षु प्ल॒वमा॑त्म॒न्वन्तं॑ प॒क्षिणं॑ तौ॒ग्र्याय॒ कम् । येन॑ देव॒त्रा मन॑सा निरू॒हथुः॑ सुपप्त॒नी पे॑तथुः॒ क्षोद॑सो म॒हः ॥ (५)
हे अश्चिनीकुमारो! तुमने तुग्र राजा के पुत्र के लिए सागर में तैरने वाली, दृढ़ एवं डांड़ों वाली नाव बनाई थी. सब देवों में तुम्हीं ने कृपा करके उसे सागर से निकाला एवं तुमने सहसा आकर विशाल सागर से उसका उद्धार किया था. (५)
O aschinikumaro! You built a boat for the son of the King Tugrah to swim in the sea, firm and stalk. Among all the gods, you kindly brought him out of the sea, and you came and saved him from the vast ocean. (5)