ऋग्वेद (मंडल 1)
तद्वां॑ नरा नासत्या॒वनु॑ ष्या॒द्यद्वां॒ माना॑स उ॒चथ॒मवो॑चन् । अ॒स्माद॒द्य सद॑सः सो॒म्यादा वि॒द्यामे॒षं वृ॒जनं॑ जी॒रदा॑नुम् ॥ (८)
हे नेता अश्विनीकुमारो! तुम अपने भक्तों द्वारा किए गए स्तुति वचनों को स्वीकार करो. बुम आज हमारे द्वारा किए जाते हुए सोम मार्ग के स्तोत्र को स्वीकार करो, जिससे हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करें. (८)
O leader Ashwinikumaro! You accept the praises made by your devotees. Bum, accept the hymns of the Som way we do today, so that we may gain food, strength and long life. (8)