ऋग्वेद (मंडल 1)
इ॒दं द्या॑वापृथिवी स॒त्यम॑स्तु॒ पित॒र्मात॒र्यदि॒होप॑ब्रु॒वे वा॑म् । भू॒तं दे॒वाना॑मव॒मे अवो॑भिर्वि॒द्यामे॒षं वृ॒जनं॑ जी॒रदा॑नुम् ॥ (११)
हे माता और पितारूपी धरती और आकाश! इस यज्ञ में मेरे द्वारा की गई स्तुतियों को सार्थक करो. तुम रक्षा साधनों द्वारा हम स्तुतिकर्तताओं के पास आओ, जिससे हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करें. (११)
O mother and fatherly earth and sky! Make the praises I have made in this yajna worthwhile. You may come to us praises by means of protection, so that we may gain food, strength, and long life. (11)