ऋग्वेद (मंडल 1)
प्रो अ॒श्विना॒वव॑से कृणुध्वं॒ प्र पू॒षणं॒ स्वत॑वसो॒ हि सन्ति॑ । अ॒द्वे॒षो विष्णु॒र्वात॑ ऋभु॒क्षा अच्छा॑ सु॒म्नाय॑ ववृतीय दे॒वान् ॥ (१०)
हे ऋत्विजो! हमारी रक्षा के लिए अश्विनीकुमारों एवं पूषा के अतिरिक्त स्वाधीन शक्ति वाले तथा द्वेषरहित विष्णु, वायु और इंद्र की भी स्तुति करो. मैं सुख प्राप्ति के लिए सब देवों के सामने स्तुति करूंगा. (१०)
Hey Ritvijo! In addition to the Ashvinikumaras and Pushas, praise vishnu, vayu and indra with independent power and without malice for our protection. I will praise all the gods for the attainment of happiness. (10)