हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.186.4

मंडल 1 → सूक्त 186 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 186
उप॑ व॒ एषे॒ नम॑सा जिगी॒षोषासा॒नक्ता॑ सु॒दुघे॑व धे॒नुः । स॒मा॒ने अह॑न्वि॒मिमा॑नो अ॒र्कं विषु॑रूपे॒ पय॑सि॒ सस्मि॒न्नूध॑न् ॥ (४)
हे देवो! जिस प्रकार दुधारू गाय सवेरे और शाम दूध काढ़ने के स्थान में जाती है, उसी प्रकार हम पापों को जीतने की इच्छा से स्तुतिवचन के साथ प्रातःसायं तुम्हारे सामने उपस्थित होते हैं. हम गाय के थनों से उत्पन्न घी, दूध आदि पदार्थो को मिलाकर प्रतिदिन लाते हैं. (४)
Oh, God! Just as the milch cow goes into the place of milking in the morning and in the evening, so we appear before you in the morning with a hymn of praise, with a desire to conquer sins. We mix ghee, milk, etc. produced from cow's trunks and bring them daily. (4)