हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.20.6

मंडल 1 → सूक्त 20 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 20
उ॒त त्यं च॑म॒सं नवं॒ त्वष्टु॑र्दे॒वस्य॒ निष्कृ॑तम् । अक॑र्त च॒तुरः॒ पुनः॑ ॥ (६)
त्वष्टा द्वारा निर्मित, सोमधारण में समर्थ चमस नाम का नया काष्ठपात्र बिलकुल तैयार हो गया था. ऋभुओं ने उसके चार टुकड़े कर दिए. (६)
A new wooden plant named Samarth Chamas in Somadharana, created by Tavasthana, was ready. The sages cut him into four pieces. (6)