ऋग्वेद (मंडल 1)
तद्विष्णोः॑ पर॒मं प॒दं सदा॑ पश्यन्ति सू॒रयः॑ । दि॒वी॑व॒ चक्षु॒रात॑तम् ॥ (२०)
आकाश के चारों ओर फैली हुई आंखें जिस प्रकार देखती हैं, उसी प्रकार विद्वान् भी विष्णु के स्वर्ग नामक परमपद पर दृष्टि रखते हैं. (२०)
Just as the eyes spread around the sky see, the scholars also look at vishnu's supreme paradise. (20)