हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.23.2

मंडल 1 → सूक्त 23 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 23
उ॒भा दे॒वा दि॑वि॒स्पृशे॑न्द्रवा॒यू ह॑वामहे । अ॒स्य सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (२)
मैं आकाश में रहने वाले इंद्र और वायु दोनों देवों को यह सोमरस पीने के लिए बुलाता हं. (२)
I call both Indra and Vayu devas living in the sky to drink this somras. (2)