ऋग्वेद (मंडल 1)
उ॒भा दे॒वा दि॑वि॒स्पृशे॑न्द्रवा॒यू ह॑वामहे । अ॒स्य सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (२)
मैं आकाश में रहने वाले इंद्र और वायु दोनों देवों को यह सोमरस पीने के लिए बुलाता हं. (२)
I call both Indra and Vayu devas living in the sky to drink this somras. (2)