हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.25.20

मंडल 1 → सूक्त 25 → श्लोक 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
त्वं विश्व॑स्य मेधिर दि॒वश्च॒ ग्मश्च॑ राजसि । स याम॑नि॒ प्रति॑ श्रुधि ॥ (२०)
हे बुद्धिमान्‌ वरुण! आकाश, धरती एवं समस्त संसार में तुम्हारा प्रकाश फैला हुआ है. तुम हमारी प्रार्थना सुनकर हमारी रक्षा करने का वचन दो. (२०)
O wise Varun! Your light is spread over the sky, the earth, and all the world. Listen to our prayers and promise to protect us. (20)