हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.33.11

मंडल 1 → सूक्त 33 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 33
अनु॑ स्व॒धाम॑क्षर॒न्नापो॑ अ॒स्याव॑र्धत॒ मध्य॒ आ ना॒व्या॑नाम् । स॒ध्री॒चीने॑न॒ मन॑सा॒ तमिन्द्र॒ ओजि॑ष्ठेन॒ हन्म॑नाहन्न॒भि द्यून् ॥ (११)
इंद्र के स्वधा मंत्र के अनुसार पानी बरसने लगा. तब वृत्र उन नदियों के बीच में पहुंचकर बढ़ने लगा, जिनमें नाव चल सकती थी. इंद्र ने शक्तिशाली एवं प्राणसंहारक वज्र द्वारा उस स्थिर मन वाले वृत्र को कुछ ही दिनों में मार डाला. (११)
According to Indra's Swadha mantra, water started to rain. Then the vritra began to rise in the middle of the rivers in which the boat could move. Indra killed that still-minded Vritra in a few days with a powerful and deadly thunderbolt. (11)