ऋग्वेद (मंडल 1)
ये ते॒ पन्थाः॑ सवितः पू॒र्व्यासो॑ऽरे॒णवः॒ सुकृ॑ता अ॒न्तरि॑क्षे । तेभि॑र्नो अ॒द्य प॒थिभिः॑ सु॒गेभी॒ रक्षा॑ च नो॒ अधि॑ च ब्रूहि देव ॥ (११)
हे सविता! आकाश में तुम्हारा मार्ग निश्चित, धूलिरहित एवं भली प्रकार बनाया गया है. तुम उसी मार्ग से आकर आज हमारी रक्षा करो. हे देव! हमारी बातें देवताओं तक पहुंचा दो. (११)
O Savita! Your path in the sky is fixed, dust free and well made. Come and protect us today by the same path. O, God! Take our words to the gods. (11)