हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.35.7

मंडल 1 → सूक्त 35 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 35
वि सु॑प॒र्णो अ॒न्तरि॑क्षाण्यख्यद्गभी॒रवे॑पा॒ असु॑रः सुनी॒थः । क्वे॒३॒॑दानीं॒ सूर्यः॒ कश्चि॑केत कत॒मां द्यां र॒श्मिर॒स्या त॑तान ॥ (७)
गंभीर कंपन वाली, सबको प्राण देने वाली और सरलता से सब जगह पहुंचने वाली सूर्य की किरणें आकाश आदि तीनों लोकों में फैली हुई हैं. यह कौन बता सकता है कि इस समय सूर्य कहां है? सूर्य की किरणें किस स्वर्गलोक में विस्तृत हैं? (७)
The rays of the sun, which are severely vibrating, giving life to all and easily reaching everywhere, are spread in the three realms of the sky, etc. Who can tell where the sun is at this time? In which paradise do the sun's rays extend? (7)