हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.37.10

मंडल 1 → सूक्त 37 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 37
उदु॒ त्ये सू॒नवो॒ गिरः॒ काष्ठा॒ अज्मे॑ष्वत्नत । वा॒श्रा अ॑भि॒ज्ञु यात॑वे ॥ (१०)
शब्दों के जन्मदाता मरुद्गण चलते समय जल का विस्तार करते हैं और रंभाती हुई गायों को घुटने तक गहरे जल में प्रवेश करने को प्रेरित करते हैं. (१०)
The birth-givers of the words extend the water while walking and motivate the ramming cows to enter deep water up to the knee. (10)