हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.37.4

मंडल 1 → सूक्त 37 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 37
प्र वः॒ शर्धा॑य॒ घृष्व॑ये त्वे॒षद्यु॑म्नाय शु॒ष्मिणे॑ । दे॒वत्तं॒ ब्रह्म॑ गायत ॥ (४)
हे ऋत्विजो! तुम्हारे बल का समर्थन करने वाले, शत्रु दमनकारी, उज्ज्वलकीर्तिसंपन्न एवं शक्तिशाली मरुतों की स्तुति हवि ग्रहण के उद्देश्य से करो. (४)
Hey Ritvijo! Praise the oppressors of your strength, the enemies who support your strength, the bright-tempered and the mighty maruts for the purpose of receiving it. (4)