हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.37.8

मंडल 1 → सूक्त 37 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 37
येषा॒मज्मे॑षु पृथि॒वी जु॑जु॒र्वाँ इ॑व वि॒श्पतिः॑ । भि॒या यामे॑षु॒ रेज॑ते ॥ (८)
हे मरुद्गणो! तुम्हारी चाल सभी पदार्थो को दूर फेंक देती है. वृद्ध एवं दुर्बल राजा शत्रु के भय से जिस प्रकार कांपता है, उसी प्रकार तुम्हारे चलने से धरती कांपती है. (८)
O deserters! Your move throws away all the substance. Just as the old and weak king trembles with the fear of the enemy, so the earth trembles by your walking. (8)