हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.38.2

मंडल 1 → सूक्त 38 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
क्व॑ नू॒नं कद्वो॒ अर्थं॒ गन्ता॑ दि॒वो न पृ॑थि॒व्याः । क्व॑ वो॒ गावो॒ न र॑ण्यन्ति ॥ (२)
हे मरुदगणो! इस समय तुम कहां हो? तुम इस यज्ञ में कब आओगे? तुम यहां आकाश से आओ, धरती से मत आना. जिस प्रकार गाएं रंभाती हैं, उसी प्रकार यजमान तुम्हें यहां बुलाते हैं. (२)
O the deserters! Where are you at this time? When will you come to this yagna? You come here from heaven, do not come from the earth. Just as the singing is rambhati, so the hosts call you here. (2)