ऋग्वेद (मंडल 1)
को दे॑व॒यन्त॑मश्नव॒ज्जनं॒ को वृ॒क्तब॑र्हिषम् । प्रप्र॑ दा॒श्वान्प॒स्त्या॑भिरस्थितान्त॒र्वाव॒त्क्षयं॑ दधे ॥ (७)
देवों की अभिलाषा करने वाले एवं यज्ञ के निमित्त कुश तोड़ने वाले यजमान के समीप ब्रह्मणस्पति के अतिरिक्त कौन देवता आ सकता है? हव्यदाता यजमान ऋत्विजों के साथ भांति-भांति की संपत्तियों से युक्त घर से निकलकर यज्ञस्थल की ओर प्रस्थान कर चुके हैं. (७)
Who can come to the host who desires the gods and breaks the Kush for the sake of yajna, besides Brahmanaspati? The havandatas have left the house with various properties with the host ritwijs and left for the yagna sthal. (7)