हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.41.6

मंडल 1 → सूक्त 41 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
स रत्नं॒ मर्त्यो॒ वसु॒ विश्वं॑ तो॒कमु॒त त्मना॑ । अच्छा॑ गच्छ॒त्यस्तृ॑तः ॥ (६)
तुम्हारे द्वारा अनुगृहीत यजमान तुम्हारे सामने ही सभी रमणीय धन प्राप्त करता है. कोई उसकी हिंसा नहीं कर सकता, अपितु वह अपने समान संतान भी प्राप्त करता है. (६)
The host you follow receives all the delightful wealth in front of you. No one can do him violence, but he also gets the same children as himself. (6)