हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.43.2

मंडल 1 → सूक्त 43 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
यथा॑ नो॒ अदि॑तिः॒ कर॒त्पश्वे॒ नृभ्यो॒ यथा॒ गवे॑ । यथा॑ तो॒काय॑ रु॒द्रिय॑म् ॥ (२)
अदिति येन-केन प्रकारेण हमें, पशुओं को, मनुष्यों को, गायों को और हमारी संतान को रुद्र संबंधी ओषधि प्रदान करें. (२)
Aditi Yen-Ken, let us, animals, humans, cows and our offspring be given rudra-related herbs. (2)