ऋग्वेद (मंडल 1)
यास्ते॑ प्र॒जा अ॒मृत॑स्य॒ पर॑स्मि॒न्धाम॑न्नृ॒तस्य॑ । मू॒र्धा नाभा॑ सोम वेन आ॒भूष॑न्तीः सोम वेदः ॥ (९)
हे सोम! मरणरहित एवं उत्तम स्थान प्राप्त करने वाले तुम सब देवों के शिरोमणि बनकर अपनी प्रजाओं की कामना करो. वह प्रजा तुम्हें सुशोभित करती है, तुम उसका ध्यान रखो. (९)
Hey Mon! Wish your people as the heads of all the gods who are without death and have attained a better place. That people adorn you, you take care of them. (9)