ऋग्वेद (मंडल 1)
आ नो॑ ना॒वा म॑ती॒नां या॒तं पा॒राय॒ गन्त॑वे । यु॒ञ्जाथा॑मश्विना॒ रथ॑म् ॥ (७)
हे अश्विनीकुमारो! स्तुतियों रूपी सागर के पार जाने के लिए तुम नौका बनकर आओ एवं धरती पर आने के लिए अपने रथ में घोड़े जोड़ो. (७)
O Ashwinikumaro! Come as a boat to go across the sea of praise and add horses to your chariot to come to the earth. (7)