हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.47.7

मंडल 1 → सूक्त 47 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 47
यन्ना॑सत्या परा॒वति॒ यद्वा॒ स्थो अधि॑ तु॒र्वशे॑ । अतो॒ रथे॑न सु॒वृता॑ न॒ आ ग॑तं सा॒कं सूर्य॑स्य र॒श्मिभिः॑ ॥ (७)
हे नासत्यो! चाहे तुम दूर देश में रहो, चाहे अत्यंत समीप, पर सूर्योदय होने पर अपने शोभन रथ पर बैठकर सूर्यकिरणों के साथ हमारे समीप आओ. (७)
O nastyo! Whether you live in a distant land, even if it is very near, sit on your shobhan chariot at sunrise and come close to us with the sun rays. (7)