हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.48.12

मंडल 1 → सूक्त 48 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 48
विश्वा॑न्दे॒वाँ आ व॑ह॒ सोम॑पीतये॒ऽन्तरि॑क्षादुष॒स्त्वम् । सास्मासु॑ धा॒ गोम॒दश्वा॑वदु॒क्थ्य१॒॑मुषो॒ वाजं॑ सु॒वीर्य॑म् ॥ (१२)
हे उषा! तुम सोमपान के लिए अंतरिक्ष से सभी देवों को हमारे यज्ञस्थान में ले आओ. हे उषा! तुम हमें अश्व एवं गायों से युक्त प्रशंसनीय एवं शक्तिसंपन्न अन्न दो. (१२)
Oh, Usha! You bring all the gods from space to our yajnasthan for sompan. Oh, Usha! You give us praiseworthy and powerful food containing horses and cows. (12)