हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.5.3

मंडल 1 → सूक्त 5 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 5
स घा॑ नो॒ योग॒ आ भु॑व॒त्स रा॒ये स पुरं॑ध्याम् । गम॒द्वाजे॑भि॒रा स नः॑ ॥ (३)
वह ही इंद्र हमारे अभावों को पूरा करें, हमें धन दें, अनेक प्रकार की बुद्धि प्रदान करें और भांति-भांति के अन्न लेकर हमारे पास आवें. (३)
May the same Indra make up for our deprivations, give us wealth, give us many kinds of wisdom and come to us with various kinds of food. (3)