हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.50.11

मंडल 1 → सूक्त 50 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
उ॒द्यन्न॒द्य मि॑त्रमह आ॒रोह॒न्नुत्त॑रां॒ दिव॑म् । हृ॒द्रो॒गं मम॑ सूर्य हरि॒माणं॑ च नाशय ॥ (११)
हे सूर्य! तुम सबके अनुकूल प्रकाश से युक्त हो. तुम आज उदय होकर एवं ऊंचे आकाश में चढ़कर मेरा हृदय-रोग एवं हरिमाण नामक शरीर रोग नष्ट करो. (११)
O sun! You are equipped with light suited to all. You rise today and go up in the high sky and destroy my heart disease and my body disease called Harimana. (11)