हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.54.11

मंडल 1 → सूक्त 54 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 54
स शेवृ॑ध॒मधि॑ धा द्यु॒म्नम॒स्मे महि॑ क्ष॒त्रं ज॑ना॒षाळि॑न्द्र॒ तव्य॑म् । रक्षा॑ च नो म॒घोनः॑ पा॒हि सू॒रीन्रा॒ये च॑ नः स्वप॒त्या इ॒षे धाः॑ ॥ (११)
हे इंद्र! तुम हमें रोगों की शांति के उपरांत बढ़ने वाला यश दो. हमें महान्‌ एवं शत्रुओं को हराने वाला बल दो, हमें धनवान्‌ बनाकर हमारी रक्षा करो, विद्वानों का पालन करो एवं हमें धन, सुंदर संतान तथा अन्न दो. (११)
O Indra! You give us the glory that grows after the peace of diseases. Give us the strength to defeat great and enemies, protect us by making us rich, follow the scholars and give us wealth, beautiful children and food. (11)