हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.54.9

मंडल 1 → सूक्त 54 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 54
तुभ्येदे॒ते ब॑हु॒ला अद्रि॑दुग्धाश्चमू॒षद॑श्चम॒सा इ॑न्द्र॒पानाः॑ । व्य॑श्नुहि त॒र्पया॒ काम॑मेषा॒मथा॒ मनो॑ वसु॒देया॑य कृष्व ॥ (९)
हे इंद्र! यह सोमरस पत्थर की सहायता से तैयार किया गया है एवं पात्रों में रखा हुआ है. यह तुम्हारे पीने योग्य है. तुम इसे पीकर अपनी अभिलाषा पूर्ण करो एवं उसके पश्चात्‌ हमें धन देने के कर्म में अपना मन लगाओ. (९)
O Indra! It is designed with the help of somras stone and is kept in the characters. It's worth your drinking. Drink it and fulfill your desire and then put your mind into the work of giving us money. (9)