ऋग्वेद (मंडल 1)
स॒ना॒युवो॒ नम॑सा॒ नव्यो॑ अ॒र्कैर्व॑सू॒यवो॑ म॒तयो॑ दस्म दद्रुः । पतिं॒ न पत्नी॑रुश॒तीरु॒शन्तं॑ स्पृ॒शन्ति॑ त्वा शवसावन्मनी॒षाः ॥ (११)
हे दर्शनीय इंद्र! लोग मंत्र और प्रणाम के द्वारा तुम्हारी स्तुति करते हैं. अग्निहोत्र आदि सनातन कर्म एवं धन की इच्छा करने वाले बुद्धिमान् लोग बड़े प्रयत्नों के बाद तुम्हें प्राप्त करते हैं. हे बलवान् इंद्र! जैसे पतिकामा नारियां पति को प्राप्त करती हैं, उसी प्रकार बुद्धिमानों की स्तुतियां तुम्हारे पास पहुंचती हैं. (११)
O seeable Indra! People praise you through mantras and salutations. The wise people who desire eternal deeds and wealth like Agnihotra etc. get you after great efforts. O Balavan Indra! Just as the husbands receive the husband, so the praises of the wise come to you. (11)